Friday, October 30, 2009

कुमारी
"कुमारी गृहकन्या च कन्या घृतकुमारिका | कुमारी भेदनी शीता तिक्ता नेत्र्या रसायनी ||
मधुरा ब्रुहनी बल्या वृष्या वातविषप्रनुत | गुल्मप्लिहयक्रुदवृद्धिकफज्वरहरी हरेत ||
ग्रन्थ्यअग्निदग्धविस्फोटपित्तरक्तत्वगामयान |"
( भावप्रकाश )
" गृहकन्या हिमा तिक्ता मदगंद्धि: कफापहा| पित्तकासविषश्वासकुष्ठ्घ्नी च रसायनी ||
( राजनिघंटु )

कुमारीच्या पानाला कापल्यावर एक पिवळ्या रंगाचा रस निघतो जो थंड होउन घट्ट होतो त्याला " कुमारिसार"
म्हणतात
संस्कृत नाम :कुमारिसार सहासार कन्यासार
हिंदी: मुसब्बर एलुआ मराठी : कालाबोल गुजराथी : ऐलियो
English:Aloes


कुमारी प्रयोग/ कर्म
दोषप्रयोग : कफपित्तहर
बाह्यप्रयोग : १: शोथ्वेदानायुक्त विकार यात कोरफड लेप
२: जीर्ण व्रण
३: प्लीहावृद्धि- कुमारी मज्जा + हरिद्रा चूर्ण गरम करून लावणे
४: नेत्राभीश्यंद -स्वरस
आभ्यंतर प्रयोग :
पचन संस्थान : अग्निमांद्य ,उदररोग , गुल्म , प्लीहा-यकृत-वृद्धी ,उदरशुल, विबंध तसेच कृमिरोगा मध्ये
कुमारी स्वरसाचा उपयोग करतात
रक्तवह संस्थान : रक्तविकार शोथ
मुत्रवह संस्थान : मुत्रकष्टता
प्रजनन संस्थान : शुक्रदौर्बल्य रजोरोध
प्रयोज्य अंग : पत्र
मात्रा : पत्र स्वरस :१० -२० मिली
चूर्ण : ०.१-०.३ ग्राम
विशिष्ठ योग : कुमार्यासव ,कुमारिका वटी, रज्प्रवर्तनि वटी, कुमारीका पाक
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संदर्भ : 1. भावप्रकाश
2 . राजनिघंटु
3.द्रव्यगुन विज्ञान (आचार्य प्रीयावत शर्मा)
4:english refernce from wikipedia

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